snehaṃ ca vṛṣṇipārthānāṃ teṣāṃ bhaktiṃ ca keśave|| 14
अर्थ
इसके साथ ही उन्हें यह भी सुननेको मिलता था कि भगवान् श्रीकृष्णने अश्वत्थामाके ब्रह्मास्त्रकी ज्वालासे किस प्रकार उनकी रक्षा की थी, यदुवंशी और पाण्डवोंमें परस्पर कितना प्रेम था तथा पाण्डवोंकी भगवान् श्रीकृष्णमें कितनी भक्ति थी॥ १४॥
आत्मानं च परित्रातमश्वत्थाम्नोऽस्त्रतेजसः।
स्नेहं च वृष्णिपार्थानां तेषां भक्तिं च केशवे॥ १४
इसके साथ ही उन्हें यह भी सुननेको मिलता था कि भगवान् श्रीकृष्णने अश्वत्थामाके ब्रह्मास्त्रकी ज्वालासे किस प्रकार उनकी रक्षा की थी, यदुवंशी और पाण्डवोंमें परस्पर कितना प्रेम था तथा पाण्डवोंकी भगवान् श्रीकृष्णमें कितनी भक्ति थी॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.16.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 159) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/16/14/