श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.16.14

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

आत्मानं च परित्रातमश्‍वत्थाम्नोऽस्त्रतेजसः।

स्नेहं च वृष्णिपार्थानां तेषां भक्तिं च केशवे॥ १४

ātmānaṃ ca paritrātamaśvatthāmno'stratejasaḥ|

snehaṃ ca vṛṣṇipārthānāṃ teṣāṃ bhaktiṃ ca keśave|| 14

अर्थ

इसके साथ ही उन्हें यह भी सुननेको मिलता था कि भगवान् श्रीकृष्णने अश्‍वत्थामाके ब्रह्मास्त्रकी ज्वालासे किस प्रकार उनकी रक्षा की थी, यदुवंशी और पाण्डवोंमें परस्पर कितना प्रेम था तथा पाण्डवोंकी भगवान् श्रीकृष्णमें कितनी भक्ति थी॥ १४॥

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