श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.15.49

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

विदुरोऽपि परित्यज्य प्रभासे देहमात्मवान्३।

कृष्णावेशेन तच्चित्तः पितृभिः स्वक्षयं ययौ॥ ४९

viduro'pi parityajya prabhāse dehamātmavān|

kṛṣṇāveśena taccittaḥ pitṛbhiḥ svakṣayaṃ yayau|| 49

अर्थ

संयमी एवं श्रीकृष्णके प्रेमावेशमें मुग्ध भगवन्मय विदुरजीने भी अपने शरीरको प्रभासक्षेत्रमें त्याग दिया। उस समय उन्हें लेनेके लिये आये हुए पितरोंके साथ वे अपने लोक (यमलोक)-को चले गये॥ ४९॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—देहमात्मनः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 157)

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