श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.15.50

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

द्रौपदी च तदाऽऽज्ञाय पतीनामनपेक्षताम्।

वासुदेवे भगवति ह्येकान्तमतिराप तम्॥ ५०

draupadī ca tadā''jñāya patīnāmanapekṣatām|

vāsudeve bhagavati hyekāntamatirāpa tam|| 50

अर्थ

द्रौपदीने देखा कि अब पाण्डवलोग निरपेक्ष हो गये हैं; तब वे अनन्यप्रेमसे भगवान् श्रीकृष्णका ही चिन्तन करके उन्हें प्राप्त हो गयीं॥ ५०॥

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