श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.10.26

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

अहो अलं श्लाघ्यतमं यदोः कुलमहो अलं पुण्यतमं मधोर्वनम्।✎ 1519

यदेष पुंसामृषभः श्रियः पतिः स्वजन्मना२ चङ्‌क्रमणेन चाञ्चति॥ २६

aho alaṃ ślāghyatamaṃ yadoḥ kulamaho alaṃ puṇyatamaṃ madhorvanam|

yadeṣa puṃsāmṛṣabhaḥ śriyaḥ patiḥ svajanmanā caṅkramaṇena cāñcati|| 26

अर्थ

अहो! यह यदुवंश परम प्रशंसनीय है; क्योंकि लक्ष्मीपति पुरुषोत्तम श्रीकृष्णने जन्म ग्रहण करके इस वंशको सम्मानित किया है। वह पवित्र मधुवन (व्रजमण्डल) भी अत्यन्त धन्य है जिसे इन्होंने अपने शैशव एवं किशोरावस्थामें घूम-फिरकर सुशोभित किया है॥ २६॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—सुजन्मना।

    (मुद्रित पृष्ठ 128)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1519 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: कुल- महो → कुलमहो

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