श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.6

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

प्रमाणं तस्य को वेद ह्यनन्तस्याक्षरात्मनः।

ब्रह्मणे हरिणा तद्दिक् चतुःश्‍लोक्या प्रदर्शिता॥ ६

pramāṇaṃ tasya ko veda hyanantasyākṣarātmanaḥ|

brahmaṇe hariṇā taddik catuḥślokyā pradarśitā|| 6

अर्थ

श्रीमद्भागवत अनन्त, अक्षरस्वरूप है; इसका नियत प्रमाण भला कौन जान सकता है? पूर्वकालमें भगवान् विष्णुने ब्रह्माजीके प्रति चार श्‍लोकोंमें इसका दिग्दर्शनमात्र कराया था॥ ६॥

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