॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.4.5
ज्ञानविज्ञानभक्त्यङ्गचतुष्टयपरं वचः।
मायामर्दनदक्षं च विद्धि भागवतं च तत्॥ ५
jñānavijñānabhaktyaṅgacatuṣṭayaparaṃ vacaḥ|
māyāmardanadakṣaṃ ca viddhi bhāgavataṃ ca tat|| 5
अर्थ
जो वाक्य ज्ञान, विज्ञान, भक्ति एवं इनके अंगभूत साधनचतुष्टयको प्रकाशित करनेवाला है तथा जो मायाका मर्दन करनेमें समर्थ है, उसे भी तुम श्रीमद्भागवत समझो॥ ५॥