श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.40

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

उभयोर्वैपरीत्ये तु रसाभासे फलच्युतिः।

किन्तु कृष्णार्थिनां सिद्धिर्विलम्बेनापि जायते॥ ४०

ubhayorvaiparītye tu rasābhāse phalacyutiḥ|

kintu kṛṣṇārthināṃ siddhirvilambenāpi jāyate|| 40

अर्थ

यदि दोनों विपरीत विचारके हों तो रसाभास हो जाता है, अतः फलकी हानि होती है। किन्तु जो श्रीकृष्णको चाहनेवाले वक्ता और श्रोता हैं, उन्हें विलम्ब होनेपर भी सिद्धि अवश्य मिलती है॥ ४०॥

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