जिनके यहाँ श्रीमद्भागवतकी कथा-वार्ता होती हो तथा जो लोग उस कथाके श्रवणमें लगे रहते हों, उनकी सेवा और सहायता अपने शरीर और धनसे करनी चाहिये॥ ३७॥
यत्र भागवती वार्ता ये च तच्छ्रवणे रताः।
तेषां संसेवनं कुर्याद् देहेन च धनेन च॥ ३७
जिनके यहाँ श्रीमद्भागवतकी कथा-वार्ता होती हो तथा जो लोग उस कथाके श्रवणमें लगे रहते हों, उनकी सेवा और सहायता अपने शरीर और धनसे करनी चाहिये॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1007) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/4/37/