श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.37

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

यत्र भागवती वार्ता ये च तच्छ्रवणे रताः।

तेषां संसेवनं कुर्याद् देहेन च धनेन च॥ ३७

yatra bhāgavatī vārtā ye ca tacchravaṇe ratāḥ|

teṣāṃ saṃsevanaṃ kuryād dehena ca dhanena ca|| 37

अर्थ

जिनके यहाँ श्रीमद्भागवतकी कथा-वार्ता होती हो तथा जो लोग उस कथाके श्रवणमें लगे रहते हों, उनकी सेवा और सहायता अपने शरीर और धनसे करनी चाहिये॥ ३७॥

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