॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.4.28
वर्षमासदिनानां तु विमुच्य नियमाग्रहम्।
सर्वदा प्रेमभक्त्यैव सेवनं निर्गुणं मतम्॥ २८
varṣamāsadinānāṃ tu vimucya niyamāgraham|
sarvadā premabhaktyaiva sevanaṃ nirguṇaṃ matam|| 28
अर्थ
जब वर्ष, महीना और दिनोंके नियमका आग्रह छोड़कर सदा ही प्रेम और भक्तिके साथ श्रवण किया जाय, तब वह सेवन ‘निर्गुण’ माना गया है॥ २८॥