yauṣmākīṇāmabhimatasiddhiṃ savitā sa eva savitānām|| 27
अर्थ
इस प्रकार जब उस महान् उत्सवका विस्तार होगा, तब निश्चय है कि वहाँ उद्धवजीका दर्शन मिलेगा। वे ही भलीभाँति तुम सब लोगोंके मनोरथ पूर्ण करेंगे’’॥ २७॥
तत्रोद्धवावलोको भविता नियतं महोत्सवे वितते।
यौष्माकीणामभिमतसिद्धिं सविता स एव सवितानाम्॥ २७
इस प्रकार जब उस महान् उत्सवका विस्तार होगा, तब निश्चय है कि वहाँ उद्धवजीका दर्शन मिलेगा। वे ही भलीभाँति तुम सब लोगोंके मनोरथ पूर्ण करेंगे’’॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.2.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 992) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/2/27/