श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.17

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तेनैव भवतीनां चेद् भवेदत्र समागमः।

तर्हि नित्यं स्वकान्तेन विहारमपि लप्स्यथ॥ १७

tenaiva bhavatīnāṃ ced bhavedatra samāgamaḥ|

tarhi nityaṃ svakāntena vihāramapi lapsyatha|| 17

अर्थ

यदि तुम्हें भी उद्धवजीका सत्संग प्राप्त हो जाय, तो तुम सब भी अपने प्रियतम श्रीकृष्णके साथ नित्यविहारका सुख प्राप्त कर लोगी॥ १७॥

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