॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.2.15
युष्माकमपि कृष्णेन विरहो नैव सर्वतः।
किन्तु एवं न जानीथ तस्माद् व्याकुलतामिताः॥ १५
yuṣmākamapi kṛṣṇena viraho naiva sarvataḥ|
kintu evaṃ na jānītha tasmād vyākulatāmitāḥ|| 15
अर्थ
तुमलोगोंका भी सर्वांशमें श्रीकृष्णके साथ वियोग नहीं हुआ है, किन्तु तुम इस रहस्यको इस रूपमें जानती नहीं हो, इसीलिये इतनी व्याकुल हो रही हो॥ १५॥