॥ श्रीहरिः ॥
तस्माच्चिन्ता न ते कार्या वज्रनाभ मदाज्ञया।
वासयात्र बहून् ग्रामान् संसिद्धिस्ते भविष्यति॥ ३६
tasmāccintā na te kāryā vajranābha madājñayā|
vāsayātra bahūn grāmān saṃsiddhiste bhaviṣyati|| 36
अर्थ
इसलिये वज्रनाभ! तुम्हें तनिक भी चिन्ता नहीं करनी चाहिये। तुम मेरी आज्ञासे यहाँ बहुत-से गाँव बसाओ; इससे निश्चय ही तुम्हारे मनोरथोंकी सिद्धि होगी॥ ३६॥
तस्माच्चिन्ता न ते कार्या वज्रनाभ मदाज्ञया।
वासयात्र बहून् ग्रामान् संसिद्धिस्ते भविष्यति॥ ३६
इसलिये वज्रनाभ! तुम्हें तनिक भी चिन्ता नहीं करनी चाहिये। तुम मेरी आज्ञासे यहाँ बहुत-से गाँव बसाओ; इससे निश्चय ही तुम्हारे मनोरथोंकी सिद्धि होगी॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 987) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/1/36/