श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.14

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तस्मान्‍नाल्पापि मे चिन्ता क्षात्रं दृढमुपेयुषः।

किन्त्वेका परमा चिन्ता तत्र किंचिद् विचार्यताम्॥ १४

tasmānnālpāpi me cintā kṣātraṃ dṛḍhamupeyuṣaḥ|

kintvekā paramā cintā tatra kiṃcid vicāryatām|| 14

अर्थ

इसलिये मुझे किसी बातकी तनिक भी चिन्ता नहीं है; क्योंकि उनकी कृपासे मैं क्षत्रियोचित शूरवीरतासे भलीभाँति सम्पन्‍न हूँ। मुझे केवल एक बातकी बहुत बड़ी चिन्ता है, आप उसके सम्बन्धमें कुछ विचार कीजिये॥ १४॥

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