॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.6.84
सूत उवाच
एवं ब्रुवाणे सति बादरायणौ मध्ये सभायां हरिराविरासीत्।
प्रह्रादबल्युद्धवफाल्गुनादिभिर्वृतः सुरर्षिस्तमपूजयच्च तान्॥ ८४✎ 983 984
evaṃ bruvāṇe sati bādarāyaṇau madhye sabhāyāṃ harirāvirāsīt|
prahrādabalyuddhavaphālgunādibhirvṛtaḥ surarṣistamapūjayacca tān|| 84
अर्थ
सूतजी कहते हैं—श्रीशुकदेवजी इस प्रकार कह ही रहे थे कि उस सभाके बीचोबीच प्रह्लाद, बलि, उद्धव और अर्जुन आदि पार्षदोंके सहित साक्षात् श्रीहरि प्रकट हो गये। तब देवर्षि नारदने भगवान् और उनके भक्तोंकी यथोचित पूजा की॥ ८४॥