परम तेजस्वी शुकदेवजीको देखकर सारे सभासद् झटपट खड़े हो गये और उन्हें एक ऊँचे आसनपर बैठाया। फिर देवर्षि नारदजीने उनका प्रेमपूर्वक पूजन किया। उन्होंने सुखपूर्वक बैठकर कहा—‘आपलोग मेरी निर्मल वाणी सुनिये’॥ ७९॥
दृष्ट्वा सदस्याः परमोरुतेजसं सद्यः समुत्थाय ददुर्महासनम्।
प्रीत्या सुरर्षिस्तमपूजयत्सुखं स्थितोऽवदत्संशृणुतामलां गिरम्॥ ७९
परम तेजस्वी शुकदेवजीको देखकर सारे सभासद् झटपट खड़े हो गये और उन्हें एक ऊँचे आसनपर बैठाया। फिर देवर्षि नारदजीने उनका प्रेमपूर्वक पूजन किया। उन्होंने सुखपूर्वक बैठकर कहा—‘आपलोग मेरी निर्मल वाणी सुनिये’॥ ७९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.79 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 77) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/79/