॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.6.63
दोषयोः प्रशमार्थं च पठेन्नामसहस्रकम्।
तेन स्यात्सफलं सर्वं नास्त्यस्मादधिकं यतः॥ ६३
doṣayoḥ praśamārthaṃ ca paṭhennāmasahasrakam|
tena syātsaphalaṃ sarvaṃ nāstyasmādadhikaṃ yataḥ|| 63
अर्थ
होम करनेकी शक्ति न हो तो उसका फल प्राप्त करनेके लिये ब्राह्मणोंको हवनसामग्री दान करे तथा नाना प्रकारकी त्रुटियोंको दूर करनेके लिये और विधिमें फिर जो न्यूनाधिकता रह गयी हो, उसके दोषोंकी शान्तिके लिये विष्णुसहस्रनामका पाठ करे। उससे सभी कर्म सफल हो जाते हैं; क्योंकि कोई भी कर्म इससे बढ़कर नहीं है॥ ६२-६३॥