श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.62

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

होमाशक्तौ बुधो हौम्यं दद्यात्तत्फलसिद्धये।

नानाच्छिद्रनिरोधार्थं न्यूनताधिकतानयोः॥ ६२

homāśaktau budho haumyaṃ dadyāttatphalasiddhaye|

nānācchidranirodhārthaṃ nyūnatādhikatānayoḥ|| 62

अर्थ

होम करनेकी शक्ति न हो तो उसका फल प्राप्त करनेके लिये ब्राह्मणोंको हवनसामग्री दान करे तथा नाना प्रकारकी त्रुटियोंको दूर करनेके लिये और विधिमें फिर जो न्यूनाधिकता रह गयी हो, उसके दोषोंकी शान्तिके लिये विष्णुसहस्रनामका पाठ करे। उससे सभी कर्म सफल हो जाते हैं; क्योंकि कोई भी कर्म इससे बढ़कर नहीं है॥ ६२-६३॥

यह अर्थ श्लोक 62–63 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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