फिर प्रयत्न करके देश-देशान्तरोंमें यह संवाद भेजना चाहिये कि यहाँ कथा होगी, सब लोगोंको सपरिवार पधारना चाहिये॥ ५॥✎ 1270
देशे देशे तथा सेयं वार्ता प्रेष्या प्रयत्नतः।
भविष्यति कथा चात्र आगन्तव्यं कुटुम्बिभिः॥ ५
फिर प्रयत्न करके देश-देशान्तरोंमें यह संवाद भेजना चाहिये कि यहाँ कथा होगी, सब लोगोंको सपरिवार पधारना चाहिये॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 71) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1270 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-की → श्रीमद्भागवतकी