मैं तो उपवासकी अपेक्षा भोजन करना अच्छा समझता हूँ, यदि वह कथाश्रवणमें सहायक हो। यदि उपवाससे श्रवणमें बाधा पहुँचती हो तो वह किसी कामका नहीं॥ ४३॥
भोजनं तु वरं मन्ये कथाश्रवणकारकम्।
नोपवासो वरः प्रोक्तः कथाविघ्नकरो यदि॥ ४३
मैं तो उपवासकी अपेक्षा भोजन करना अच्छा समझता हूँ, यदि वह कथाश्रवणमें सहायक हो। यदि उपवाससे श्रवणमें बाधा पहुँचती हो तो वह किसी कामका नहीं॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 74) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/43/