अथवा फलाहार या एक समय ही भोजन करे। जिससे जैसा नियम सुभीतेसे सध सके, उसीको कथाश्रवणके लिये ग्रहण करे॥ ४२॥
फलाहारेण वा भाव्यमेकभुक्तेन वा पुनः।
सुखसाध्यं भवेद्यत्तु कर्तव्यं श्रवणाय तत्॥ ४२
अथवा फलाहार या एक समय ही भोजन करे। जिससे जैसा नियम सुभीतेसे सध सके, उसीको कथाश्रवणके लिये ग्रहण करे॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 74) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/42/