श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.40

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

मलमूत्रजयार्थं हि लघ्वाहारः सुखावहः।

हविष्यान्‍नेन कर्तव्यो ह्येकवारं कथार्थिना॥ ४०

malamūtrajayārthaṃ hi laghvāhāraḥ sukhāvahaḥ|

haviṣyānnena kartavyo hyekavāraṃ kathārthinā|| 40

अर्थ

कथाके समय मल-मूत्रके वेगको काबूमें रखनेके लिये अल्पाहार सुखकारी होता है; इसलिये श्रोता केवल एक ही समय हविष्यान्‍न भोजन करे॥ ४०॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें