श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.25

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

पितॄन् संतर्प्य शुद्ध्यर्थं प्रायश्चित्तं समाचरेत्।

मण्डलं च प्रकर्तव्यं तत्र स्थाप्यो हरिस्तथा॥ २५

pitṝn saṃtarpya śuddhyarthaṃ prāyaścittaṃ samācaret|

maṇḍalaṃ ca prakartavyaṃ tatra sthāpyo haristathā|| 25

अर्थ

तदनन्तर पितृगणका तर्पण कर पूर्व पापोंकी शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त करे और एक मण्डल बनाकर उसमें श्रीहरिको स्थापित करे॥ २५॥

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