श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.10

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

नावकाशः कदाचिच्चेद् दिनमात्रं तथापि तु।

सर्वथाऽऽगमनं कार्यं क्षणोऽत्रैव सुदुर्लभः॥ १०

nāvakāśaḥ kadācicced dinamātraṃ tathāpi tu|

sarvathā''gamanaṃ kāryaṃ kṣaṇo'traiva sudurlabhaḥ|| 10

अर्थ

यदि आपको विशेष अवकाश न हो, तो भी एक दिनके लिये तो अवश्य ही कृपा करनी चाहिये; क्योंकि यहाँका तो एक क्षण भी अत्यन्त दुर्लभ है’॥ १०॥✎ 1270

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1270 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-की → श्रीमद्भागवतकी

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