श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.84

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

प्रेषिता हरिलोके ते यत्र गच्छन्ति योगिनः।

गोकर्णेन स गोपालो गोलोकं गोपवल्लभम्।

कथाश्रवणतः प्रीतो निर्ययौ भक्तवत्सलः॥ ८४

preṣitā hariloke te yatra gacchanti yoginaḥ|

gokarṇena sa gopālo golokaṃ gopavallabham|

kathāśravaṇataḥ prīto niryayau bhaktavatsalaḥ|| 84

अर्थ

तथा जहाँ योगिजन जाते हैं, उस भगवद्धाममें वे भेज दिये गये। इस प्रकार भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण कथाश्रवणसे प्रसन्‍न होकर गोकर्णजीको साथ ले अपने ग्वालबालोंके प्रिय गोलोकधाममें चले गये॥ ८४॥

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