उस गाँवमें कुत्ते और चाण्डालपर्यन्त जितने भी जीव थे, वे सभी गोकर्णजीकी कृपासे विमानोंपर चढ़ा लिये गये॥ ८३॥
तद्ग्रामे ये स्थिता जीवा आश्वचाण्डालजातयः।
विमाने स्थापितास्तेऽपि गोकर्णकृपया तदा॥ ८३
उस गाँवमें कुत्ते और चाण्डालपर्यन्त जितने भी जीव थे, वे सभी गोकर्णजीकी कृपासे विमानोंपर चढ़ा लिये गये॥ ८३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.83 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 69) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/83/