श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.62

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

सप्ताहश्रवणाल्लोके प्राप्यते निकटे हरिः।

अतो दोषनिवृत्त्यर्थमेतदेव हि साधनम्॥ ६२

saptāhaśravaṇālloke prāpyate nikaṭe hariḥ|

ato doṣanivṛttyarthametadeva hi sādhanam|| 62

अर्थ

इस लोकमें सप्ताहश्रवण करनेसे भगवान्‌की शीघ्र ही प्राप्ति हो सकती है। अतः सब प्रकारके दोषोंकी निवृत्तिके लिये एकमात्र यही साधन है॥ ६२॥✎ 17

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #17 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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