श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.61

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

यत्प्रातः संस्कृतं चान्‍नं सायं तच्च विनश्यति।

तदीयरससम्पुष्टे काये का नाम नित्यता॥ ६१

yatprātaḥ saṃskṛtaṃ cānnaṃ sāyaṃ tacca vinaśyati|

tadīyarasasampuṣṭe kāye kā nāma nityatā|| 61

अर्थ

जो अन्‍न प्रातःकाल पकाया जाता है, वह सायंकालतक बिगड़ जाता है; फिर उसीके रससे पुष्ट हुए शरीरकी नित्यता कैसी॥ ६१॥

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