॥ श्रीहरिः ॥
ननाम भ्रातरं सद्यो गोकर्णमिति चाब्रवीत्।
त्वयाहं मोचितो बन्धो कृपया प्रेतकश्मलात्॥ ५२
nanāma bhrātaraṃ sadyo gokarṇamiti cābravīt|
tvayāhaṃ mocito bandho kṛpayā pretakaśmalāt|| 52
अर्थ
उसने तुरन्त अपने भाई गोकर्णको प्रणाम करके कहा—‘भाई! तुमने कृपा करके मुझे प्रेतयोनिकी यातनाओंसे मुक्त कर दिया॥ ५२॥
ननाम भ्रातरं सद्यो गोकर्णमिति चाब्रवीत्।
त्वयाहं मोचितो बन्धो कृपया प्रेतकश्मलात्॥ ५२
उसने तुरन्त अपने भाई गोकर्णको प्रणाम करके कहा—‘भाई! तुमने कृपा करके मुझे प्रेतयोनिकी यातनाओंसे मुक्त कर दिया॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 66) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/52/