श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.34

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

इति तद्वाक्यमाकर्ण्य गोकर्णो विस्मयं गतः।

शतश्राद्धैर्न मुक्तिश्चेदसाध्यं मोचनं तव॥ ३४

iti tadvākyamākarṇya gokarṇo vismayaṃ gataḥ|

śataśrāddhairna muktiścedasādhyaṃ mocanaṃ tava|| 34

अर्थ

प्रेतकी यह बात सुनकर गोकर्णको बड़ा आश्‍चर्य हुआ। वे कहने लगे—‘यदि सैकड़ों गया-श्राद्धोंसे भी तुम्हारी मुक्ति नहीं हो सकती, तब तो तुम्हारी मुक्ति असम्भव ही है॥ ३४॥

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