श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.31

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

गोकर्ण उवाच

त्वदर्थं तु गयापिण्डो मया दत्तो विधानतः।

तत्कथं नैव मुक्तोऽसि ममाश्‍चर्यमिदं महत्॥ ३१

tvadarthaṃ tu gayāpiṇḍo mayā datto vidhānataḥ|

tatkathaṃ naiva mukto'si mamāścaryamidaṃ mahat|| 31

अर्थ

गोकर्णने कहा—भाई! मुझे इस बातका बड़ा आश्‍चर्य है—मैंने तुम्हारे लिये विधिपूर्वक गयाजीमें पिण्डदान किया, फिर भी तुम प्रेतयोनिसे मुक्त कैसे नहीं हुए?॥ ३१॥

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