श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.2

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

इति तद्वाक्यसंत्रासाज्जनन्या पुत्रदुःखतः।

कूपे पातः कृतो रात्रौ तेन सा निधनं गता॥ २

iti tadvākyasaṃtrāsājjananyā putraduḥkhataḥ|

kūpe pātaḥ kṛto rātrau tena sā nidhanaṃ gatā|| 2

अर्थ

उसकी इस धमकीसे डरकर और पुत्रके उपद्रवोंसे दुःखी होकर वह रात्रिके समय कुएँमें जा गिरी और इसीसे उसकी मृत्यु हो गयी॥ २॥

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