श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.1

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

अथ पञ्चमोऽध्यायः

धुन्धुकारीको प्रेतयोनिकी प्राप्ति और उससे उद्धार

सूत उवाच

पितर्युपरते तेन जननी ताडिता भृशम्।

क्‍व वित्तं तिष्ठति ब्रूहि हनिष्ये लत्तया न चेत्॥ १

pitaryuparate tena jananī tāḍitā bhṛśam|

kva vittaṃ tiṣṭhati brūhi haniṣye lattayā na cet|| 1

अर्थ

सूतजी कहते हैं—शौनकजी! पिताके वन चले जानेपर एक दिन धुन्धुकारीने अपनी माताको बहुत पीटा और कहा—‘बता, धन कहाँ रखा है? नहीं तो अभी तेरी लुआठी (जलती लकड़ी)-से खबर लूँगा॥ १॥

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