श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.8

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अलौकिकोऽयं महिमा मुनीश्‍वराः सप्ताहजन्योऽद्य विलोकितो मया।

मूढाः शठा ये पशुपक्षिणोऽत्र सर्वेऽपि निष्पापतमा भवन्ति॥ ८

alaukiko'yaṃ mahimā munīśvarāḥ saptāhajanyo'dya vilokito mayā|

mūḍhāḥ śaṭhā ye paśupakṣiṇo'tra sarve'pi niṣpāpatamā bhavanti|| 8

अर्थ

मुनीश्‍वरगण! आज सप्ताहश्रवणकी मैंने यह बड़ी ही अलौकिक महिमा देखी। यहाँ तो जो बड़े मूर्ख, दुष्ट और पशु-पक्षी भी हैं, वे सभी अत्यन्त निष्पाप हो गये हैं॥ ८॥

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