॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.4.7
तत्सभासंस्थितानां च देहगेहात्मविस्मृतिः।
दृष्ट्वा च तन्मयावस्थां नारदो वाक्यमब्रवीत्॥ ७
tatsabhāsaṃsthitānāṃ ca dehagehātmavismṛtiḥ|
dṛṣṭvā ca tanmayāvasthāṃ nārado vākyamabravīt|| 7
अर्थ
उस सभामें जो लोग बैठे थे, उन्हें अपने देह, गेह और आत्माकी भी कोई सुधि न रही। उनकी ऐसी तन्मयता देखकर नारदजी कहने लगे—॥ ७॥