श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.76

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मुञ्चाज्ञानं प्रजारूपं मोहतो नरके गतिः।

निपतिष्यति देहोऽयं सर्वं त्यक्‍त्वा वनं व्रज॥ ७६

muñcājñānaṃ prajārūpaṃ mohato narake gatiḥ|

nipatiṣyati deho'yaṃ sarvaṃ tyaktvā vanaṃ vraja|| 76

अर्थ

‘यह मेरा पुत्र है’ इस अज्ञानको छोड़ दीजिये। मोहसे नरककी प्राप्ति होती है। यह शरीर तो नष्ट होगा ही। इसलिये सब कुछ छोड़कर वनमें चले जाइये॥ ७६॥

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