॥ श्रीहरिः ॥
मुञ्चाज्ञानं प्रजारूपं मोहतो नरके गतिः।
निपतिष्यति देहोऽयं सर्वं त्यक्त्वा वनं व्रज॥ ७६
muñcājñānaṃ prajārūpaṃ mohato narake gatiḥ|
nipatiṣyati deho'yaṃ sarvaṃ tyaktvā vanaṃ vraja|| 76
अर्थ
‘यह मेरा पुत्र है’ इस अज्ञानको छोड़ दीजिये। मोहसे नरककी प्राप्ति होती है। यह शरीर तो नष्ट होगा ही। इसलिये सब कुछ छोड़कर वनमें चले जाइये॥ ७६॥
मुञ्चाज्ञानं प्रजारूपं मोहतो नरके गतिः।
निपतिष्यति देहोऽयं सर्वं त्यक्त्वा वनं व्रज॥ ७६
‘यह मेरा पुत्र है’ इस अज्ञानको छोड़ दीजिये। मोहसे नरककी प्राप्ति होती है। यह शरीर तो नष्ट होगा ही। इसलिये सब कुछ छोड़कर वनमें चले जाइये॥ ७६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.76 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 61) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/76/