na cendrasya sukhaṃ kiñcinna sukhaṃ cakravartinaḥ|
sukhamasti viraktasya munerekāntajīvinaḥ|| 75
अर्थ
सुख न तो इन्द्रको है और न चक्रवर्ती राजाको ही; सुख है तो केवल विरक्त, एकान्तजीवी मुनिको॥ ७५॥
न चेन्द्रस्य सुखं किञ्चिन्न सुखं चक्रवर्तिनः।
सुखमस्ति विरक्तस्य मुनेरेकान्तजीविनः॥ ७५
सुख न तो इन्द्रको है और न चक्रवर्ती राजाको ही; सुख है तो केवल विरक्त, एकान्तजीवी मुनिको॥ ७५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.75 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 61) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/75/