तू इस समय इसकी जाँच करनेके लिये यह फल गौको खिला दे।’ ब्राह्मणीने स्त्रीस्वभाववश जो-जो उसकी बहिनने कहा था, वैसे ही सब किया॥ ५५॥✎ 1569
फलमर्पय धेन्वै त्वं परीक्षार्थं तु साम्प्रतम्।
तत्तदाचरितं सर्वं तथैव स्त्रीस्वभावतः॥ ५५
तू इस समय इसकी जाँच करनेके लिये यह फल गौको खिला दे।’ ब्राह्मणीने स्त्रीस्वभाववश जो-जो उसकी बहिनने कहा था, वैसे ही सब किया॥ ५५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.55 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 59) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/55/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)