श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.50

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

एवं कुतर्कयोगेन तत्फलं नैव भक्षितम्।

पत्या पृष्टं फलं भुक्तं भुक्तं चेति तयेरितम्॥ ५०

evaṃ kutarkayogena tatphalaṃ naiva bhakṣitam|

patyā pṛṣṭaṃ phalaṃ bhuktaṃ bhuktaṃ ceti tayeritam|| 50

अर्थ

मनमें ऐसे ही तरह-तरहके कुतर्क उठनेसे उसने वह फल नहीं खाया और जब उसके पतिने पूछा—‘फल खा लिया?’ तब उसने कह दिया—‘हाँ, खा लिया’॥ ५०॥

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