श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.35

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

शृणु विप्र मया तेऽद्य प्रारब्धं तु विलोकितम्।

सप्तजन्मावधि तव पुत्रो नैव च नैव च॥ ३५

śṛṇu vipra mayā te'dya prārabdhaṃ tu vilokitam|

saptajanmāvadhi tava putro naiva ca naiva ca|| 35

अर्थ

विप्रवर! सुनो; मैंने इस समय तुम्हारा प्रारब्ध देखकर निश्‍चय किया है कि सात जन्मतक तुम्हारे कोई सन्तान किसी प्रकार नहीं हो सकती॥ ३५॥

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