श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.34

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

यतिरुवाच

मुञ्चाज्ञानं प्रजारूपं बलिष्ठा कर्मणो गतिः।

विवेकं तु समासाद्य त्यज संसारवासनाम्॥ ३४

muñcājñānaṃ prajārūpaṃ baliṣṭhā karmaṇo gatiḥ|

vivekaṃ tu samāsādya tyaja saṃsāravāsanām|| 34

अर्थ

संन्यासीने कहा—ब्राह्मणदेवता! इस प्रजाप्राप्तिका मोह त्याग दो। कर्मकी गति प्रबल है, विवेकका आश्रय लेकर संसारकी वासना छोड़ दो॥ ३४॥

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