॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.3.6
रम्यमेकान्तदेशस्थं हेमपद्मसुसौरभम्।
यत्समीपस्थजीवानां वैरं चेतसि न स्थितम्॥ ६
ramyamekāntadeśasthaṃ hemapadmasusaurabham|
yatsamīpasthajīvānāṃ vairaṃ cetasi na sthitam|| 6
अर्थ
वह घाट बड़ा ही सुरम्य और एकान्त प्रदेशमें है, वहाँ हर समय सुनहले कमलोंकी सुगन्ध आया करती है। उसके आस-पास रहनेवाले सिंह, हाथी आदि परस्पर-विरोधी जीवोंके चित्तमें भी वैरभाव नहीं है॥ ६॥