श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.4

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

कुमारा ऊचुः

शृणु नारद वक्ष्यामो विनम्राय विवेकिने।

गङ्गाद्वारसमीपे तु तटमानन्दनामकम्॥ ४

śṛṇu nārada vakṣyāmo vinamrāya vivekine|

gaṅgādvārasamīpe tu taṭamānandanāmakam|| 4

अर्थ

सनकादि बोले—नारदजी! आप बड़े विनीत और विवेकी हैं। सुनिये, हम आपको ये सब बातें बताते हैं। हरिद्वारके पास आनन्द नामका एक घाट है॥ ४॥

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