तब प्रेमरस प्रवाहित करनेवाली भक्ति ज्ञान और वैराग्यको साथ लेकर प्रत्येक घर और व्यक्तिके हृदयमें क्रीड़ा करेगी॥ ६३॥
ज्ञानवैराग्यसंयुक्ता भक्तिः प्रेमरसावहा।
प्रतिगेहं प्रतिजनं ततः क्रीडां करिष्यति॥ ६३
तब प्रेमरस प्रवाहित करनेवाली भक्ति ज्ञान और वैराग्यको साथ लेकर प्रत्येक घर और व्यक्तिके हृदयमें क्रीड़ा करेगी॥ ६३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.63 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 46) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/63/