श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.63

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ज्ञानवैराग्यसंयुक्ता भक्तिः प्रेमरसावहा।

प्रतिगेहं प्रतिजनं ततः क्रीडां करिष्यति॥ ६३

jñānavairāgyasaṃyuktā bhaktiḥ premarasāvahā|

pratigehaṃ pratijanaṃ tataḥ krīḍāṃ kariṣyati|| 63

अर्थ

तब प्रेमरस प्रवाहित करनेवाली भक्ति ज्ञान और वैराग्यको साथ लेकर प्रत्येक घर और व्यक्तिके हृदयमें क्रीड़ा करेगी॥ ६३॥

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