श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.42

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

एवमृषिगणैः पृष्टैर्निर्णीयोक्तं दुरासदम्॥ ४२

evamṛṣigaṇaiḥ pṛṣṭairnirṇīyoktaṃ durāsadam|| 42

अर्थ

इस प्रकार जिन-जिन ऋषियोंसे इसके विषयमें पूछा गया, उन्होंने निर्णय करके यही कहा कि यह बात दुःसाध्य ही है॥ ४२॥

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