श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.41

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

योगिना नारदेनापि स्वयं न ज्ञायते तु यत्।

तत्कथं शक्यते वक्तुमितरैरिह मानुषैः॥ ४१

yoginā nāradenāpi svayaṃ na jñāyate tu yat|

tatkathaṃ śakyate vaktumitarairiha mānuṣaiḥ|| 41

अर्थ

स्वयं योगिराज नारदको भी जिसका ज्ञान नहीं है, उसे दूसरे संसारी लोग कैसे बता सकते हैं?’॥ ४१॥

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