udyamaḥ saphalaste'yaṃ bhaviṣyati na saṃśayaḥ|| 31
अर्थ
उसी समय यह आकाशवाणी हुई कि ‘मुने! खेद मत करो, तुम्हारा यह उद्योग निःसंदेह सफल होगा॥ ३१॥✎ 1966
व्योमवाणी तदैवाभून्मा ऋषे खिद्यतामिति।
उद्यमः सफलस्तेऽयं भविष्यति न संशयः॥ ३१
उसी समय यह आकाशवाणी हुई कि ‘मुने! खेद मत करो, तुम्हारा यह उद्योग निःसंदेह सफल होगा॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 43) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी