श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.30

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अहो निद्रा कथं याति वृद्धत्वं च महत्तरम्।

चिन्तयन्‍निति गोविन्दं स्मारयामास भार्गव॥ ३०

aho nidrā kathaṃ yāti vṛddhatvaṃ ca mahattaram|

cintayanniti govindaṃ smārayāmāsa bhārgava|| 30

अर्थ

इनकी यह नींद और इससे भी बढ़कर इनकी वृद्धावस्था कैसे दूर हो?’ शौनकजी! इस प्रकार चिन्ता करते-करते वे भगवान्‌का स्मरण करने लगे॥ ३०॥✎ 1966

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी

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