श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.26

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

मुखं संयोज्य कर्णान्ते शब्दमुच्चैः समुच्चरन्।

ज्ञान प्रबुध्यतां शीघ्रं रे वैराग्य प्रबुध्यताम्॥ २६

mukhaṃ saṃyojya karṇānte śabdamuccaiḥ samuccaran|

jñāna prabudhyatāṃ śīghraṃ re vairāgya prabudhyatām|| 26

अर्थ

फिर उनके कानके पास मुँह लगाकर जोरसे कहा, ‘ओ ज्ञान! जल्दी जग पड़ो; ओ वैराग्य! जल्दी जग पड़ो।’॥ २६॥✎ 1966

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी

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