सूतजी कहते हैं—भक्तिके ये वचन सुनकर नारदजीको बड़ी करुणा आयी और वे उन्हें हाथसे हिला-डुलाकर जगाने लगे॥ २५॥✎ 1966
तस्या वचः समाकर्ण्य कारुण्यं नारदो गतः।
तयोर्बोधनमारेभे कराग्रेण विमर्दयन्॥ २५
सूतजी कहते हैं—भक्तिके ये वचन सुनकर नारदजीको बड़ी करुणा आयी और वे उन्हें हाथसे हिला-डुलाकर जगाने लगे॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 42) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी